5 हालिया क्लेम नियम बदलाव जो आपको जानने चाहिए
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने हाल ही में स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी कई नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसका उद्देश्य सभी पॉलिसीधारकों के लिए सेवा की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाना है। इन बदलावों को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों की विविध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लागू किया गया है, ताकि बीमा उत्पादों को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जा सके।
उदाहरण के लिए, इस साल की शुरुआत में IRDAI ने स्वास्थ्य बीमा उत्पाद खरीदने के लिए 65 वर्ष की अधिकतम उम्र सीमा को समाप्त कर दिया। इस नीति परिवर्तन ने स्वास्थ्य बीमा को और अधिक लोकतांत्रिक बना दिया, जिससे सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए बीमा उत्पाद उपलब्ध हो गए।
IRDAI के कुछ प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
कहीं भी कैशलेस सुविधा:
अब पॉलिसीधारक कैशलेस इलाज किसी भी अस्पताल में प्राप्त कर सकते हैं, चाहे वह अस्पताल उनके बीमा कंपनी के नेटवर्क में हो या न हो। इस बदलाव से पॉलिसीधारक अपनी पसंद के अस्पताल, चिकित्सक और स्थान के आधार पर उपचार चुन सकते हैं, बिना यह चिंता किए कि अस्पताल उनके बीमाकर्ता के नेटवर्क में है या नहीं।
कैशलेस क्लेम की त्वरित स्वीकृति:
IRDAI ने बीमाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अस्पताल से डिस्चार्ज अनुरोध प्राप्त करने के तीन घंटे के भीतर अंतिम स्वीकृति प्रदान करें। अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो बीमाकर्ता को तुरंत क्लेम निपटान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और अस्पताल से मृत शरीर को तुरंत रिहा करवाना होगा। यह पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा और क्लेम प्रक्रिया को सुचारू बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नो-क्लेम बोनस में बदलाव:
अब ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार नो-क्लेम बोनस (NCB) का लाभ उठा सकते हैं। वे इसे या तो बीमित राशि में वृद्धि के रूप में चुन सकते हैं या प्रीमियम पर छूट के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। इससे पॉलिसीधारक को अधिक लचीलापन मिलता है।
पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि में कमी:
कुछ बीमारियां जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि पहले बीमा कंपनी द्वारा 4 साल की प्रतीक्षा अवधि के बाद कवर की जाती थीं। लेकिन अब यह प्रतीक्षा अवधि घटाकर 3 साल कर दी गई है, जिससे ग्राहक जल्दी बीमा कवरेज प्राप्त कर सकते हैं।
मोराटोरियम अवधि में कमी:
जब कोई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी 5 साल तक सक्रिय रहती है, तो बीमाकर्ता गैर-प्रकटीकरण या गलत प्रस्तुति के आधार पर क्लेम को अस्वीकार नहीं कर सकता, सिवाय धोखाधड़ी के मामलों में। पहले यह अवधि 8 साल थी।
निष्कर्ष
ये नए नियम भारत में स्वास्थ्य बीमा की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव लाएंगे और इससे जनता में स्वास्थ्य बीमा के प्रति विश्वास और भागीदारी में वृद्धि होगी।