आज के दौर में जिस तरह महंगाई दिनों दिन बढ़ती जा रही है, इस तरह जीवन बीमा प्रीमियम (इंश्योरेंस प्रीमियम) की दरें भी बढ़ रही है| हालांकि जीवन बीमा प्रीमियम की तरह बढ़ाने के पीछे कुछ अस्थाई कारण है तो कुछ स्थाई कारण भी हैं जिनके बारे में हम यहां पर चर्चा करने जा रहे हैं | अगर हम देखें कोरोना पांडेमिक के बाद प्रीमियम दरें काफी तेजी से बड़ी है अनुमानित 1 से 2% प्रतिवर्ष| अगर हम टर्म इंश्योरेंस की बात करें तो पिछले 4 साल में लगभग 33 % टर्म इंश्योरेंस प्रीमियम की दरें बड़ी है जो कि अपने आप में बहुत बड़ा मार्जिन है| लेकिन जीवन बीमा प्रीमियम के बढ़ जाने के पीछे कुछ स्थाई कारण भी होते हैं जिनको मैं आपके साथ साझा कर रहा हूं|
उम्र (Age)
उम्र जीवन बीमा की दरों को तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आमतौर पर, जब आप कम उम्र में पॉलिसी खरीदते हैं, तो आपके प्रीमियम कम होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कम उम्र के लोगों को बीमा करने का जोखिम कम होता है, क्योंकि उनके स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना कम होती है। लेकिन वही आप अगर 40 साल की उम्र के बाद पॉलिसी खरीदने हैं तो वह वहीं पर प्रीमियम की तरह 10 से 15 % तक बढ़ जाती हैं इसलिए टाइम इंश्योरेंस जितना जल्दी खरीद सकते हैं उतना बेहतर होता है
जीवनशैली (Lifestyle)
हम सभी जानते हैं कि जिस तरह की हम जीवन शैली जीते हैं वह यह निर्धारित करती है कि हमारा जीवन कितना लंबा हो सकता है एक अच्छी जीवन शैली जीना कहीं ना कहीं यह सुनिश्चित करता है कि हम एक लंबी उम्र तक जीवित रह सकते हैं हालांकि जीवनशैली जीवन बीमा की दरों को तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| जीवनशैली के चुनाव, जैसे कि धूम्रपान, शराब पीना, और जोखिम भरे गतिविधियों में भाग लेना, जीवन बीमा की दरों को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, धूम्रपान करने वालों को गैर–धूम्रपान करने वालों की तुलना में अधिक प्रीमियम देना पड़ता है, क्योंकि धूम्रपान से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम अधिक होते हैं।
स्वास्थ्य इतिहास (Health History)
आजकल की जीवन शैली में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियां आम बात हो गई है और हमने देखा है कि यह दोनों बीमारियां कहीं ना कहीं आपके परिवार के स्वास्थ्य इतिहास पर भी निर्भर करती हैं यदि आपके परिवार में किसी को डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी बीमारी है तो कहीं ना कहीं कुछ हद तक चांस हो जाते हैं कि वह आपको भी हो सकती है | आपका स्वास्थ्य वर्तमान और भूतकाल किस तरह का रहा है यह भी जीवन बीमा की दरों को तय करने में महत्वपूर्ण होता है। बीमाकर्ता आपके मेडिकल रिकॉर्ड, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, और कभी–कभी आपके परिवार के स्वास्थ्य इतिहास की भी जांच करते हैं। पूर्व–मौजूद परिस्थितियों, दीर्घकालिक बीमारियों, या गंभीर बीमारियों के इतिहास के कारण प्रीमियम अधिक हो सकते हैं।
परिवार का चिकित्सा इतिहास (Family Health History)
कुछ बीमाकर्ता आपके परिवार के चिकित्सा इतिहास को ध्यान में रखते हैं, खासकर अगर वहां वंशानुगत बीमारियों (hereditary diseases) का इतिहास है। यह दरों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इससे कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी के मां-बाप दोनों या उनमें से किसी एक को हाई बीपी शुगर , कैंसर जैसी बीमारियां हैं, इस स्थिति में कंपनी आपका फिजिकल मेडिकल हेल्थ चेकअप करवाएगी और इस रिपोर्ट के आधार पर आपकी प्रीमियम का निर्णय होगा|
पेशा और शौक (Profession and hobbies)
कुछ पेशे और शौक जो जोखिम भरे माने जाते हैं जो वास्तव में जीवन बीमा की दरों को तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जीवन बीमा की दरों को प्रभावित कर सकते हैं। शारीरिक श्रम या खतरनाक परिस्थितियों वाले पेशे, और शौक जैसे स्काइडाइविंग या रॉक क्लाइम्बिंग करने से प्रीमियम अधिक हो सकते हैं। और इन पैसिव इस तरह की जो प्रोफाइल में प्रीमियम लोडिंग चार्ज लगाए जा सकते हैं क्योंकि कहीं ना कहीं रिस्की जो प्रोफाइल में जीवन के लिए खतरा बना रहता है |
पॉलिसी का प्रकार और कवरेज राशि (Policy type and coverage amount)
कभी-कभी जीवन बीमा प्रीमियम की राशि इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप जो पॉलिसी का चुनाव कर रहे हैं उस पॉलिसी की कुल समय अवधि क्या है या वह पॉलिसी कितने लंबे समय के लिए रहेगी साथ ही उस पॉलिसी के अंदर एडीशनल फीचर्स जो आप चुनते हैं वह भी पॉलिसी का प्रीमियम कुछ हद तक बढ़ा देते हैं| आपके द्वारा चुनी गई पॉलिसी का प्रकार और कवरेज की राशि भी दरों को प्रभावित करती है। संपूर्ण जीवन बीमा आमतौर पर साधारण टर्म जीवन बीमा से अधिक महंगी होती है, और अधिक कवरेज राशि से प्रीमियम भी अधिक हो जाते हैं।
लिंग (Gender)
सांख्यिकी के अनुसार, महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं, जिससे महिलाओं के लिए जीवन बीमा की दरें कम हो जाती हैं। बीमाकर्ता जीवन प्रत्याशा की गणना का उपयोग जोखिम का अनुमान लगाने के लिए करते हैं, जिससे प्रीमियम पर प्रभाव पड़ता है। लाइफ इंश्योरेंस की कीमत तय करने में लिंग भी एक महत्वपूर्ण कारक है। बीमा कंपनियाँ सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग करती हैं ताकि किसी विशेष प्रोफाइल वाले व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा का अनुमान लगा सकें। औसतन, महिलाएं पुरुषों की तुलना में लगभग पांच साल अधिक जीवित रहती हैं, इसलिए उन्हें प्रीमियम दरें भी कम मिलती हैं।
आशा करता हूं यह लेख पढ़ने के बाद बहुत हद तक आप समझ पाए होंगे की जीवन बीमा प्रीमियम किन बातों पर निर्भर करता है कि वह अधिक और काम हो सकता है | इस ब्लॉक को पढ़ने के बाद आप जीवन बीमा लेने से पहले सभी बातों और सभी पहलुओं पर ध्यान करेंगे और तभी एक उचित निर्णय लेंगे अधिक जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी रजिस्टर्ड जीवन बीमा एजेंट से भी संपर्क कर सकते हैं|
FAQ:-
Q1. जीवन बीमा में जोखिम कैसे निर्धारित होता है?
Ans. जीवन बीमा प्रीमियम कई कारकों के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जैसे पॉलिसीधारक की आयु, स्वास्थ्य, जीवनशैली, व्यवसाय, और कवरेज की राशि।
Q2. भारतीय जीवन बीमा निगम का पूरा नाम?
Ans. भारतीय जीवन बीमा निगम या एलआईसी है|
Q.3 जीरो कॉस्ट इन्शुरन्स क्या होता है?
Ans. आपकी वित्तीय जिम्मेदारियों के समाप्त होने के बाद सभी प्रीमियम (जीएसटी को छोड़कर) वापस पाने और योजना से बाहर निकलने का विकल्प देता है।